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Friday, 20 December 2013

CONTROL YOUR ANDROID PHONE FORM YOUR COMPUTERS

Hello friends, hope you are all fine. Nowadays most of us use android phone and me too so I searched through online to control my mobile from my computer, in that way I found one way. You can ask me is it possible and even simple? The Answer is YES! You can by an simple application which is free in the market called “Airdroid”.

Why I choose this?
 There are many free applications in android market to control and connect your android phone with PC without cable. But the main problem is they uses more memory from your phone so it causes mobile hanging and slows down our phone software processing speed. In this way “AIRDROID” uses very less memory to process this so there is nothing affected by this application.

http://www.2012-tricks.blogspot.com


Steps to follow:
Step 1Download and Install “AirDroid” application on your Android Device from android market, its fully free application.



Step 2 : After installing Airdroid on your device simply Run it and you will see the screen like the above page. In this you can see the URL(ip address)  and password field.
Step 3: Now you are successfully installed your apps, and ready to connect with you computer. For this you need a web browser.
Step 4: Then open your browser and enter the URL(ip address with port) you see in your Airdroid Device App in your web browsers field like below and hit enter.



Step 5: After you hit enter the new Airdroid will page and prompt you to enter PASSWORD, So you have you enter your password which you seen in your Airdoid Device application. Then click Login.
Step 6 : Now you are ready to Control you android device from your PC. Just control everything. ….

See you in the next post.  Thanks for watching this friends…..

पासपोर्ट बनवाने का आसान तरीका !

पासपोर्ट के बगैर विदेश जाना मुमकिन नहीं। विदेश जाने के अलावा आईडी/अड्रेस प्रूफ के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है !पासपोर्ट कोई भी भारतीय नागरिक चाहे वो एक दिन की उम्र का बच्चा हो या फिर किसी भी उम्र का हो बनवा सकता है !




अगर कोई पासपोर्ट बनवाना चाहता है तो उसके पास ज़रूरी दस्तावेज होने चाहिए! एज(आयु) प्रूफ के लिए बर्थ सर्टिफिकेट या 10वीं क्लास के पास सर्टिफिकेट की सेल्फ अटेस्टेड फोटो कॉपी! जिन लोगों के पास डेट ऑफ बर्थ सर्टिफिकेट नहीं है, उन्हें फर्स्ट क्लास मैजिस्ट्रेट से अटेस्टेड सर्टिफिकेट की कॉपी होनी चाहिए ! अड्रेस प्रूफ के लिए वोटर आई कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक या स्टेटमेंट, ड्राइविंग लाइसेंस, इंश्योरेंस पॉलिसी, जरनल पावर ऑफ अटर्नी, बिजली-पानी आदि के बिल की सेल्फ अटेस्टेड फोटो कॉपी होनी चाहिए,अगर आप किराए के मकान में रहते हैं तो रजिस्टर्ड रेंट अग्रीमेंट के साथ एक और प्रूफ होना चाहिए दूसरे प्रूफ के तौर पर पैन कार्ड, पासबुक, डीएल आदि की कॉपी दे सकते हैं! आईडी प्रूफ के लिए वोटर आई कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, आधार कार्ड, फोटो लगी पासबुक!

हमारे देश भारत में पासपोर्ट तिन प्रकार का होता है और इन तीनो को रंग के आधार पर पहचाना जा सकता है!
पहला नीला होता है और ये साधारण लोगो को दिया जाता है !दूसरा सफ़ेद होता है ये पासपोर्ट सरकारी कर्मचारी को सरकारी काम से विदेश जाने पर दिया जाता है और तीसरा होता है मरून कलर यानि कथई रंग इस रंग का पासपोर्ट डिप्लोमैट्स और सीनियर सरकारी अधिकारियों को दिया जाता है !

पासपोर्ट बनवाना बहुत मुश्किल भरा काम है अप्लिकेशन फॉर्म भरो फिर पासपोर्ट ऑफिस जाओ वहा लम्बी लम्बी लाईनें लगी रहती हैं उनमे लगो फिर आप का फॉर्म जमा होगा उसके कुछ दिन बाद पुलिस वेरिफिकेशन होगा तब जा के पासपोर्ट डाक द्वारा आएगा !

लेकिन पिछले कुछ महीनो में इस प्रक्रिया में कुछ बदलाव हुवा है जिससे पासपोर्ट अप्लाई करना थोडा आसन हुवा है ! अब पासपोर्ट अप्लाई करने के लिए कही जाने की ज़रूरत नहीं है घर बैठे ऑन लाइन पासपोर्ट के लिए अप्लाई किया जा सकता है इसके लिए www.passportindia.gov.in/ वेबसाइट पर जाएँ और वहा राइट साइड में Online Application Filing कॉलम में New Userके सामने Register पर क्लिक करें! इसके बाद आप यहां मांगी गई जानकारी भरकर यूजर आईडी बनाएं! इसके बाद आपको ई-फॉर्म का ऑप्शन मिल जाएगा! अगर आप पहली बार अप्लाई कर रहे हैं, तो फ्रेश कैटिगरी के लिए बना फॉर्म भरें! पहली बार पासपोर्ट बनवा रहे हैं या दोबारा अप्लाई कर रहे हैं, सबसे पहले फॉर्म को ठीक से पढ़ें। अपनी पढ़ाई, जन्म, पते आदि के कागजात भी सामने रखें! हर शब्द, हर स्पेलिंग वही भरें, जैसा आपके कागजात में लिखा गया है, वरना ऐप्लिकेशन रिजेक्ट हो सकता है या करेक्शन कराने के लिए आपको चक्कर काटने पड़ सकते हैं।

सारी जानकारियां सही-सही भरकर फॉर्म को अपलोड कर दें! फॉर्म के अपलोड होने के तुरंत बाद ही आपका ऐप्लिकेशन रेफरेंस नंबर (एआरएन) बन जाएगा! इसके बाद अपॉइटमेंट में शेड्यूल करें और अपॉइंटमेंट की रसीद का प्रिंट आउट लेकर अपने पास रख लें! इस स्लिप के साथ आप को अगर आप आवेदक हैं तो को अपने इलाके के पासपोर्ट सेवा केंद्र (पीएसके) ऑफिस पहुंचना होगा!  ऑनलाइन फॉर्म भरने के दौरान ही आपको पासपोर्ट सेवा केंद्र का ऑप्शन भी मिलेगा! यहां आवेदक को अपने सभी ऑरिजिनल डॉक्युमेंट्स (जो ऑनलाइन फॉर्म भरते वक्त बताए गए थे) को अपने साथ लेकर आना जरूरी है! इसके साथ ही हर डॉक्युमेंट की सेल्फ अटेस्टेड फोटो कॉपी भी साथ में होना जरूरी है! काउंटर पर बैठे कर्मचारी एआरएन के साथ ऑरिजिनल डॉक्युमेंट्स देखने के बाद उनकी फोटोकॉपी फॉर्म के साथ जमा कर लेंगे!

ऑन लाइन पासपोर्ट अप्लाई की सुविधा में कुछ असुविधा भी ,अपॉइटमेंट लेने में बहुत परेशानी है सिर्फ ५ मिनट का वक़्त मिलता है इतने देर में आगे आप को अपॉइटमेंट मिला तो ठीक है नहीं तो वेबसाइट बंद हो जाती है फिर अगले दिन कोशिश करना पड़ता है ,जो पढ़े लिखे नहीं हैं उनको दुसरो पर निर्भर रहना पड़ता है ,वेरिफिकेशन के लिए आवेदक को खुद जाना पड़ता है वो भी उसी दिन और तारीख को जो अपॉइटमेंट में मिला रहता है यानि आप अपने सुविधा अनुसार किसी भी दिन और वक़्त नहीं जा सकते हैं ,बच्चो और बूढों को ले जाने में परेशानी होती है !एक और बड़ी परेशानी है पहले फीस भरने की ,फीस लेने के बाद ही सरकारी अफसर कागजात आदि की जांच करते हैं! कागजात में कमी या रिजेक्शन आदि होने पर फीस बेकार हो जाती है! दोबारा अप्लाई करने पर फिर से फीस भरनी होगी!

कहानी मोबाइल की । .....

चालीस साल पहले तीन अप्रैल 1973 को मोटोरोला के इंजीनियर मार्टिन कूपर ने अपनी प्रतिद्वंदी कंपनी के एक कर्मचारी को फ़ोन कर मोबाइल फ़ोन पर बातचीत की शुरुआत की थी. इसके क़रीब 10 साल बाद मोटोरोला ने पहला मोबाइल हैंडसेट बाजार में उतारा था इसकी क़ीमत थी क़रीब दो लाख रुपये| आज दुनिया में इसके क़रीब साढ़े छह अरब उपभोक्ता हैं| मोटोरोला के पहले हैंडसेट का नाम था, डायना टीएसी इसकी बैट्री को एक बार रिचार्ज कर क़रीब 35 मिनट तक बातचीत की जा सकती थी. डायना टीएसी को बाज़ार में उतारने से पहले उसका वजन क़रीब 794 ग्राम तक कम किया गया। 






इसके बाद भी यह इतना भारी था कि इसकी चोट से किसी की जान जा सकती थी. हास्य कलाकार एरिन वाइज ने 1985 में सेंट कैथरीन बंदरगाह से वोडाफ़ोन के दफ्तर फोन कर ब्रिटेन में मोबाइल फ़ोन के इस्तेमाल की शुरुआत की| ओ2 के नाम से मशहूर सेलनेट ने 1985में अपनी सेवा शुरू करके वोडाफोन का एकाधिकार तो़ड़ दिया| वोडाफ़ोन को दस लाख ग्राहक बनाने में नौ साल का समय लगा| वहीं सेलनेट ने केवल डेढ़ साल में ही अगले दस लाख ग्राहक जोड़ लिए| फ्रांसीसी व्यवसायी फ़िलिप ख़ान ने 11 जून 1997 को अपनी नवजात बेटी सोफ़ी की फोटो लेकर कैमरे वाले मोबाइल फ़ोन की शुरुआत की| भारत सहित कई दूसरे देशों ने पिछले कुछ सालों में गाड़ी चलाते समय मोबाइल फ़ोन पर बात करने पर प्रतिबंधित लगा दिया है| एरिजोना के एक प्रतिष्ठान ने सितंबर 2007 में कुत्तों के लिए मोबाइल फ़ोन बाज़ार में उतारा क़रीब 25 हज़ार रुपये की क़ीमत वाला यह फ़ोन जीपीएस सैटेलाइट सुविधा से लैस था. साल 1993 में आयोजित वायरलेस वर्ल्ड कांफ्रेंस में आईबीएम सिमान नाम का पहला स्मार्टफ़ोन पेश किया गया| इसमें शुरुआती दौर की टचस्क्रीन लगी हुई थी. यह ईमेल, इलेक्ट्रिक पेजर, कैलेंडर, कैलकुलेटर और ऐड्रेस बुक के रूप में काम करता था| टैक्स मैसेज के लिए 160 अक्षरों की सीमा फ्रीडेलहम हेलीब्रांड नाम के एक जर्मन इजीनियर ने शुरू की इसका ख्याल उन्हें अपने टाइपराइटर पर काम करते हुए आया पोस्टकार्ड की लंबाई और बिजनेस टेलीग्राम के अध्ययन ने उनकी इस धारणा की पुष्टि की मोबाइल इंडस्ट्री ने इसे 1986 में मापडंद बना लिया. इसका प्रभाव हम ट्विटर पर भी देख सकते हैं. साल 2012 में एक अरब 70 करोड़ मोबाइल हैंडसेट बिके| सबसे अधिक बिकने वालों में सैमसंग, नोकिया और ऐप्पल के हैंडसेट शामिल थे| ब्रिटेन में पहला एसएमएस नील पापवर्थ नाम के एक इंजीनियर ने तीन दिसंबर 1992 को ऑरबिटल 901 हैंडसेट ने अपने मित्र रिचर्ड जॉर्विस को भेजा था उन्होंने लिखा था,‘मैरी क्रिसमस| ब्रिटेन में 2011 में मोबाइल फोन उपभोक्ताओं ने डेढ़ सौ अरब एसएमएस भेजे थे| एसएमएस भेजने वालों में 12 से 15 साल के बच्चों की संख्या अधिक थी| इन्होंने हर हफ्ते औसतन 193 एसएमएस भेजे| दुनिया भर में कहीं भी किसी भी समय लोग एक दूसरे से संपर्क करने के लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं.एक समय था जब इसके लिए लोग बहुत वजनी हैंडसेट का इस्तेमाल करते थे| आज ये मोबाइल हैंडसेट बहुत ही पतले, छोटे और सुविधाजनक हो चुके हैं| आधुनिक मोबाइल फ़ोन इंफ्रारेड, ब्लूटूथ और अन्य वायरलेस सुविधाओं से लैस हैं| मोबाइल फ़ोन की तमाम खूबियों के बाद भी इनकी कुछ कमजोरियां भी हैं, जैसे गाड़ी चलाते समय इसका इस्तेमाल ख़तरनाक है, कई बार इसका इस्तेमाल परेशान करने में भी किया जाता है. वहीं कुछ छात्र इसका इस्तेमाल नकल करने में करते हैं| इसे देखते हुए कई स्कूलों ने कक्षाओं में मोबाइल फ़ोन ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है| आजकल के मोबाइल फ़ोन पर नेट बैंकिंग, वेब सर्फिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग और वीडियो गेम जैसी सुविधाओं का आनंद लिया जा सकता है| शोध में पता चला है कि स्मार्टफ़ोन का उपयोग करने वाले लोग प्रतिदिन औसतन 12 मिनट फ़ोन कॉल्स पर खर्च करते हैं. मोबाइल फ़ोन के उपभोक्ता हैंडसेट पर गेम खेलने पर 14 मिनट खर्च करते हैं| मोबाइल फ़ोन के उपभोक्ता हैंडसेट पर औसतन 16 मिनट म्यूज़िक सुनते हैं वे सोशल मीडिया पर 17 मिनट बिताते हैं| ऑनलाइन ब्राउजिंग पर 25 मिनट गुजारते हैं. मोबाइल फ़ोन उपभोक्ता हैंडसेट का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल समय देखने के लिए करते हैं. अब तक सबसे ज्यादा बिकने वाले हैंडसेट का रिकॉर्ड नोकिया 1100 के नाम है, जिसके 2003 में लांच होने के बाद 25 करोड़ से अधिक सेट बिके थे| जब यह अफ़वाह उड़ी कि नोकिया 1100 का इस्तेमाल ऑनलाइन मनी ट्रांसफर को हैक करने में हो सकता है तो इसका सेकेंडहैंड सेट भी 10 हज़ार डॉलर में बिका| टच स्क्रीन मोबाइल फ़ोन, स्मार्टफ़ोन और टैबलेट कंप्यूटर के लिए एंड्रायड नाम का ऑपरेटिंग सिस्टम बाजार में पेश किया| मोबाइल फ़ोन निर्माताओं ने उपभोक्ताओं की ज़रूरतों को देखते हुए अब हैंडसेट में मेमोरी कार्ड के लिए जगह, फ्लिप स्क्रीन, कैमरा, टच स्क्रीन और यूएसबी पोर्ट जैसी सुविधाएं देनी शुरू कर दी हैं| भारत, अफ्रीका और ब्राजील जैसी उभरती अर्थव्यस्थाएं मोबाइल फ़ोन का प्रमुख बाज़ार हैं| भारत में हर महीने क़रीब 60 लाख मोबाइल हैंडसेट बिकते हैं| आज मोबाइल फोन पर बातचीत के लिए प्रतिदिन के रिचार्ज कूपन से लेकर मासिक बिलिंग वाले प्लान मौजूद हैं| इनके जरिए उपभोक्ता मोबाइल पर बातचीत, इंटरनेट सर्फिंग, मैसेजिंग जैसी सुविधाओं का लाभ उठाते हैं| सोनी का नया स्मार्टफ़ोन एक्सपीरिया ज़ेड पानी में भी ख़राब नहीं होता| यही नहीं यह कंपनी के कैमरों की ही तरह एचडीआर विडियो भी रिकॉर्ड कर सकता है|

कहानी मिल्खा सिंह की |

1947 का वक़्त और भारत का बटवारा जिन लोगो ने देखा और भोग है वो उस मंज़र को अपनी पूरी ज़िन्दगी में नहीं भूल सकते हैं !नफरत की लहर ने जाने कितने मासूमो की ज़िन्दगी छिन ली और कितनो को अपनों से हमेशा के लिए दूर कर दिया !बटवारे के वक़्त बहुत सारे लोग भारत से पाकिस्तान और पाकिस्तान से भारत आये इन में बहुत ऐसे लोग ऐसे भी थे जो अपने पुरे परिवार को खो दिए थे नफरत की आग ने उन के परिवारों को लील लिया था उन्ही लोगो में एक सिख बच्चा भी पाकिस्तान से अपनी जान बचा के बहुत मुस्किल से भारत आया था जिसका नाम था मिल्खा सिंह जिसको आज पूरी दुनिया फ्लाइंग सिख के नाम से भी जानती है!




मिल्खा सिंह का जन्म 8 अक्तूबर 1935 को लायलपुर जो अब पाकिस्तान में है हुवा था बटवारे के वक़्त हुवे दंगो में मिल्खा के पुरे परिवार की हत्या कर दी गई थी और मिल्खा किसी तरह अपनी जान बचाते हुवे भारत आ गए !भारत आने के बाद मिल्खा सिंग ने अपनी ज़िन्दगी फुटपाथ पर बितानी शुरू की थी उन्हों ने अपनी जीवका चलने के लिए होटलों में बर्तन मांजने लगे थे लेकिन उसी वक़्त उन्हों ने ये ठान लिया की वे खुद अपनी तक़दीर लिखेंगे ऐसी ज़िन्दगी नहीं जियेंगे और फिर मिल्खा सिंह ने 1958 के एशियाई खेलों में 200 मीटर और400 मीटर की दौड़ में भारत के लिए स्वर्ण पदक कर नया इतिहास रचा ! इसी दौरान मिल्खा सिंग को पाकिस्तान में भारत की ओर से दौड़ने का न्योता मिला लेकिन बचपन की कटु यादो की वजह से मिल्खा सिंह पाकिस्तान नहीं जाना चाहते थे ,जब ये खबर तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरु जी को हुवी तो उन्हों ने मिल्खा सिंह को बुलाया और उन्हें समझाया की यही वो वक़्त है जब आप अपना और अपने देश का नाम दुनिया में ऊँचा कर सकते हो !फिर मिल्खा सिंह पाकिस्तान गए लाहोर के 60 हज़ार दर्शकों से खचा-खच भरे स्टेडीयम में मिल्खा सिंह ने उस वक़्त के पाकिस्तान के सब से तेज़ धावक अब्दुल कादिर को 200 मीटर और 400 मीटर की दौड़ में हरा दिया,उस दौड़ को पाकिस्तान के तत्काल रास्ट्रपति जनरल अयूब भी स्टेडीयम में बैठ के देख रहे थे और वे मिल्खा सिंह से इतने प्रभावित हुवे की मेडल को मिल्खा सिंह के गले में डालते वक़्त उन्हों ने मिल्खा सिंह से पंजाबी में कहा "मिल्खा सिंह जी, तुस्सी पाकिस्तान दे विच आके दौडे नइ, तुस्सी पाकिस्तान दे विच उड़े ओ, आज पाकिस्तान तौन्नू फ्लाइंग सिख दा ख़िताब देंदा ए" जिसका हिंदी में मतलब हुवा की "तुम ने पाकिस्तान में दौड़ा नहीं है बल्कि उड़ा है और आज पाकिस्तान आप को फ्लाइंग सिख का ख़िताब देता है " और फिर वही पाकिस्तान से पूरी दुनिया मिल्खा सिंह को फ्लाइंग सिख के नाम से जानने लगी लाहोर दौड़ के बाद पाकिस्तानी धावक जिनको मिल्खा सिंह ने हराया था मिल्खा सिंह के अच्छे दोस्त हो गए थे 1962 के जंग में बंदी बनाये जाने के बाद पाकिस्तानी धावक अब्दुल कादिर जो सेना में थे मिल्खा सिंह से मिलना चाहा था और मिल्खा सिंह उनसे मेरठ जेल में मिले और दोनों दोस्त गले लग के बहुत देर तक खूब रोये थे !

मिल्खा सिंह ने 1956 के मेलबर्न ओलम्पिक ,1960 के रोम ओलम्पिक और 1964 के टोक्यो ओलम्पिक में भारत की तरफ से हिस्सा लिया बाद में उन्हें पद्मश्री की उपाधि से नवाज़ा गया!1960 में मिल्खा सिंह ने रोम ओलम्पिक में भारत के तरफ से हिस्सा लिया था लेकिन वो वहा कोई मैडल नहीं जित सके थे बाउजुद इसके रोम ओलम्पिक मिल्खा सिंह के ज़िन्दगी में एक नया मोड़ ले के आया यही पर उनकी मुलाकात निर्मल जी से हुई थी जो अब उनकी पत्नी हैं ,निर्मल जी महिला वोलीबाल की कप्तान थी !

मिल्खा सिंह का जूता जिसको उन्हों ने टोक्यो ओलम्पिक में पहना था 24 लाख में नीलाम हुवा था लेकिन इसकी कहानी भी बहुत रोचक है !

जापान से लौटने के बाद देश भर में मिल्खा सिंह के चाहने वाले उन्हें चिठ्ठी,तार,पार्सल,बधाई पत्र भेज रहे थे इसी दौरान मिल्खा सिंह के लिए एक पार्सल जापान से आया जिसको लेने के लिए भारतीय कस्टम विभाग ने 85 रूपये कस्टम ड्यूटी भरने को कहा !मिल्खा सिंह ने85 रूपये भर के उस पार्सल को छुड़ा लिया ,घर आने के बाद बहुत उत्साह से मिल्खा सिंह ने जब पार्सल खोल तो उसमे से एक जोड़ी फटा हुवा जूता गिरा और साथ में एक पत्र था जिसमे लिखा था की आप ने गलती से अपना जूता होटल में भूल के चले गए थे जब की वास्तविक बात ये थी की मिल्खा जी ने जान बुझ के वे जूते वहा छोड़ दिए थे की बाद में होटल के सफाई कर्मचारी उस जूते को फेंक देंगे !ये वही जूते थे जिनको मिल्खा सिंह ने टोक्यो ओलम्पिक में पहना था और बाद में ये जूते 24 लाख रूपये में नीलम हुवे !    

कैसे PAN CARD नंबर बता देता है आपकी पूरी कुंडली ?

चाहे ऑफिस में सैलेरी मिलने की बात हो या फिर बात हो आपके इनकम टैक्स की, पैन कार्ड की जरूरत आए दिन पड़ती ही रहती है। अब इतनी जरूरी चीज के बारे में तो आप जानना चाहेंगे ही। क्या आपको पता है कि यह इतना जरूरी क्यों होता है, या फिर इसके फायदे क्या हैं। आपका पैन कार्ड एक बहुत खास कार्ड होता है, जो आपको काफी फायदा दिला सकता है। पैन कार्ड नंबर एक 10 डिजिट का खास नंबर होता है, जो लैमिनेटेड कार्ड के रूप में आता है। 




इसे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट वाले उन लोगों को इश्यू करते हैं, जो पैन कार्ड के लिए अर्जी देते हैं। पैन कार्ड बन जाने के बाद उस व्यक्ति के सारे फाइनेंशियल ट्रान्जैक्शन डिपार्टमेंट के पैन कार्ड से लिंक हो जाते हैं। इनमें टैक्स पेमेंट, क्रेडिट कार्ड जैसे कई फाइनेंशियल लेन-देन डिपार्टमेंट की निगरानी में रहते हैं। इस नंबर के पहले तीन डिजिट अंग्रेजी के लेटर्स होते हैं। यह AAA से लेकर ZZZ तक कोई भी लेटर हो सकता है। ताजा चल रही सीरीज के हिसाब से यह तय किया जाता है। यह नंबर डिपार्टमेंट अपने हिसाब से तय करता है। 
पैन कार्ड नंबर का चौथा डिजिट भी अंग्रेजी का ही एक लेटर होता है। यह पैन कार्ड धारी का स्टेटस बताता है। इसमें- 
P- एकल व्यक्ति 
F- फर्म 
C- कंपनी 
A- AOP( असोसिएशन ऑफ पर्सन) 
T- ट्रस्ट H- HUF (हिन्दू अनडिवाइडिड फैमिली) 
B-BOI (बॉडी ऑफ इंडिविजुअल) 
L- लोकल J- आर्टिफिशियल जुडिशियल पर्सन 
G- गवर्नमेंट के लिए होता है। 
पैन कार्ड नंबर का पांचवा डिजिट भी ऐसा ही एक अंग्रेजी का लेटर होता है। यह लेटर पैन कार्डधारक के सरनेम का पहला अक्षर होता है। यह सिर्फ धारक पर निर्भर करता है। गौरतलब है कि इसमें सिर्फ धारक का लास्ट नेम ही देखा जाता है। इसके बाद पैन कार्ड में 4 नंबर होते हैं। यह नंबर 0001 से लेकर 9999 तक, कोई भी हो सकते हैं। आपके पैन कार्ड के ये नंबर उस सीरीज को दर्शाते हैं, जो मौजूदा समय में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में चल रही होती है। इसका आखिरी डिजिट एक अल्फाबेट चेक डिजिट होता है, जो कोई भी लेटर हो सकता है। क्यों है जरूरी- पैन कार्ड काफी जरूरी होता है। इसकी वजह है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से जुड़े किसी भी लेन-देन में पैन कार्ड नंबर का होना जरूरी है। 1 जनवरी, 2005 से इनकम टैक्स भरने के लिए पैन कार्ड का होना अनिवार्य कर दिया गया था। इसके अलावा, सरकारी और गैर सरकारी किसी भी लेन-देन के लिए पैन कार्ड नंबर एक सुविधाजनक कैरियर का काम करता है। आपकी जानकारी सही मानी जाती है, क्योंकि यह इनकम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा दिया जाता है।

रेलवे में ये Quota लगा कर आप भी करा सकता है अपना टिकट कन्फर्म|

भारतीय रेल को अगर भारत की जीवन रेखा कहा जाये तो इसमें कोई दो राये नहीं है ।आज के वक़्त में बिना रेल के जीवन जीने की कल्पना करना बहुत मुश्किल है क्यों की आज हर आदमी चाहे आम आदमी हो या खास वो यात्रा के लिए जयादा तर भारतीय रेल पर ही निर्भर है।भारतीय रेल के द्वारा यात्रा करने में सबसे बड़ी चुनौती रेल में आरक्षण की होती है । जब आप किसी एक जगह से दुसरे जगह यात्रा करते हैं तो सम्बंधित रेल गाड़ी में आप को अपना सिट आरक्षित करवाना पड़ता है और यही सबसे मुश्किल काम है जब आप टिकट काउंटर पर जाते है तो पता चलता है की जिस तारीख को आप अपना टिकट बुक करना चाहते हैं उसदिन किसी भी ट्रेन में कोई भी सिट खाली नहीं है और फिर मज़बूरी में आप को अपनी यात्रा की तारीख बदलनी पड़ती है या फिर परेशानी उठा के बिना आरक्षित सिट के सफ़र करना पड़ता है। लेकिन शयेद बहुत कम लोगों को ये मालूम है की भारतीय रेल में टिकट आरक्षण में कोटा का प्रवधान है ।कोटा तो हर जगह लगता है। चाहें एजुकेशन हो या रिजर्वेशन कोटे के बिना काम नहीं चलता। 
आईये देखते हैं की ट्रेन रिजर्वेशन के लिए कितने तरह के कोटे लगाए जाते हैं और इनका लाभ कौन उठा सकता है । 

भारतीय रेल्वे में उपयोग होने वाले कोटे-------


HP: हैंडिकैप कोटा। अगर आप फिजिकली हैंडिकैप हैं तो यह कोटा आपके लिए है। इस कोटे के तहत वो लोग जो विकलांग होते हैं अपनी टिकट बुक करा सकते हैं। इसके लिए उन्हें स्पेशल सीट दी जाती है। ऐसे लोगों की टिकट जल्दी क्लियर होती है।

LD : लेडीज कोटा, अब नाम से तो आप समझ ही गए होंगे की हम महिलाओं को दिए जाने वाले स्पेशल कोटे की बात कर रहे हैं। यह कोटा सबसे ज्यादा प्रचलन में है। महिलाओं के लिए अगर सीट बुक करानी हो तो आप लेडीज कोटा का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसा होने पर अगर आपकी टिकट वेटिंग लिस्ट में है तो सिर्फ लेडीज कोटे के तहत ही क्लियर की जाएगी।

DF: डिफेंस कोटा। भारतीय डिफेंस सर्विसेज में काम करने वाले सभी लोगों को यह कोटा दिया जाता है। पुलिस, आर्मी, नेवी, एयरफोर्स, सीआरपीएफ जैसी कोई भी स्पेशल फोर्स इस कोटे का खास फायदा उठा सकती है।

FT: फॉरेन टूरिस्ट कोटा। विदेशों से आए लोगों को ये कोटा दिया जाता है। इसके लिए उन्हें अपना पासपोर्ट, वीजा, और उनके देश का आईडी देना पड़ता है।

DP: ड्यूटी पास कोटा। यह वो कोटा है जिसमें रेल कर्मचारियों को सुविधाएं दी जाती हैं। इस कोटे का लाभ सिर्फ रेल्वे कर्मचारी ही ले सकते हैं।

PH: पार्लियामेंट हाउस कोटा। अब इसका नाम ही बता रहा है कि यह कोटा किसे दिया जाता है। नेताओं के लिए स्पेशल सीट इसके लिए

DP: ड्यूटी पास कोटा। यह वो कोटा है जिसमें रेल कर्मचारियों को सुविधाएं दी जाती हैं। इस कोटे का लाभ सिर्फ रेल्वे कर्मचारी ही ले सकते हैं।

PH: पार्लियामेंट हाउस कोटा। अब इसका नाम ही बता रहा है कि यह कोटा किसे दिया जाता है। नेताओं के लिए स्पेशल सीट इसके लिए

RS: रोड साइड कोटा, बड़े स्टेशनों के बीच के ऐसे स्टेशन जो कंप्यूटराइज्ड नेटवर्क से न जुडे़ हों तब उन्हें रोड साइड कोटे में रख कर टिकट रिजर्व किए जाते हैं। इनमें वेटिंग लिस्ट भी होती है।

OS: आउट स्टेशन कोटा। अपने घर से कहीं बाहर से अगर आप रिजर्वेशन करा रहे हैं तो यह कोटा लग सकता है। इसका प्रयोग ज्यादातर रेल्वे के लोग लेते हैं।

HQ: हाई ऑफिशल या हेडक्वॉर्टर कोटा। यह कोटा जज, आर्मी वालों जैसे हाई रैंक के ऑफिसर्स को दिया जाता है। इसका फायदा उठाने के लिए किसी भी बड़ी रैंक के अधिकारी को अपना आईडी प्रूफ दिखाना जरूरी है।

SS: सीनियर सिटीजन कोटा। इस कोट के लिए आपके पास सीनियर सिटीजन का सर्टिफिकेट होना जरूरी है। इस कोटे के तहत बुजर्ग लोगों को पहले सीट दी जाती है। सीनियर सिटीजन कोटा में टिकट के दाम भी कम होते है।

अपने टीवी को कंप्यूटर की तरह इस्तेमाल करें !

मार्केट में आज ऐसे-ऐसे उत्पाद मौजूद हैं, जो बहुत कम कीमतों में आपके पुराने टीवी को स्मार्ट टीवी में बदल सकते हैं! आप अपने टीवी को कंप्यूटर की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं!
मोबाइल बनाने वाली भारतीय कम्पनी Micromax ने एक ऐसा ही उपकरण बनाया है जिसका नाम है "स्मार्ट स्टिक" इस उपकरण के द्वारा आप बहुत आसानी से अपने पुराने टीवी को स्मार्ट टीवी में बदल सकते हैं । पैन ड्राइव के आकार की इस स्मार्ट स्टिक की मदद से न सिर्फ आपका टीवी स्मार्ट हो जाएगा, बल्कि आप टीवी पर इंटरनेट सर्फ कर सकते हैं, यू ट्यूब पर वीडियो देख सकते हैं! अगर आप सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर एक्टिव रहते हैं तो इस उपकरण की मदद से आप सोशल नेटवर्क पर भी एक्टिव रह सकते हैं! Micromax Smart Stick में एक जीबी की DDR-3 रैम लगी है, इसका एक गीगाहट्र्ज का एआरएम कोर्टेक्स 5 प्रोसेसर इसे शानदार स्पीड देता है, internet का इस्तेमाल करने के लिए इसमें वाई-फाई की सुविधा भी है,इसमें 4GB nand flash मेमोरी है और अगर आप चाहे तो google play से और भी बहुत सारा सॉफ्टवेर डाउनलोड कर सकते हैं! 



Micromax Smart Stick की ऑन लाइन कीमत लगभग 5000/- रुपये है।

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